बगदाद में अब्बास अराघची के सामने क्यों तैनात हो गए इराकी टैंक

बगदाद में अब्बास अराघची के सामने क्यों तैनात हो गए इराकी टैंक

इराक की राजधानी बगदाद के सबसे सुरक्षित कहे जाने वाले ग्रीन जोन में रविवार सुबह अचानक भारी हलचल शुरू हो गई। देखते ही देखते सेना के टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां सड़कों पर उतर आईं। आम लोगों के लिए यह नजारा किसी तख्तापलट या बड़े सैन्य संकट जैसा था। दिलचस्प बात यह है कि ठीक इसी दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी राजनयिक बातचीत के लिए हवाई अड्डे पर उतर रहे थे।

इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व के विश्लेषकों को चौंका दिया है। अचानक बगदाद पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुबह सेना की टैंक दाखिल हुई थी ग्रीन जोन इलाके में, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान इस ओर खींच लिया। लेकिन यह कोई सैन्य विद्रोह नहीं था। इसके पीछे इराक के नए प्रधानमंत्री अली अल-जैदी का एक बड़ा और बेहद आक्रामक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान काम कर रहा था।

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ग्रीन जोन में सुबह-सुबह क्या हुआ

रविवार तड़के इराक के काउंटर टेररिज्म सर्विस और सेना की संयुक्त टुकड़ियों ने ग्रीन जोन को चारों तरफ से घेर लिया। ग्रीन जोन वह इलाका है जहां इराक की संसद, सरकारी मुख्यालय और अमेरिकी दूतावास सहित कई देशों के राजनयिक मिशन स्थित हैं।

सुरक्षा बलों ने इस बेहद सुरक्षित इलाके में ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की। स्थानीय रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर आए वीडियो में साफ दिखा कि टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां राजनेताओं के घरों के बाहर खड़ी थीं। सुरक्षा एजेंसियों ने इस कार्रवाई में करीब 47 बड़े अधिकारियों और सांसदों को हिरासत में ले लिया। इनमें सबसे ज्यादा संख्या तेल मंत्रालय के अधिकारियों और ईरान समर्थक शिया गुटों से जुड़े नेताओं की है।

यह पूरी कार्रवाई पिछले महीने गिरफ्तार किए गए तेल मंत्रालय के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अदनान अल-जुमैली के बयानों पर आधारित थी। जुमैली से हुई पूछताछ में बड़े पैमाने पर अवैध तेल तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ। यह नेटवर्क सीधे तौर पर प्रतिबंधों को दरकिनार कर ईरानी तेल की हेराफेरी में शामिल था।


अली अल-जैदी का नया इराकी रुख

मई में सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने साफ कर दिया था कि वे देश में कानून का राज चाहते हैं। वे हथियारों पर पूरी तरह सरकारी नियंत्रण और भ्रष्टाचार के खात्मे की बात कर रहे हैं।

इराक में पिछले काफी समय से वाशिंगटन का भारी दबाव है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन और अमेरिकी प्रशासन ने बगदाद को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि तेहरान समर्थित मिलिशिया और अवैध तेल नेटवर्कों पर लगाम कसी जाए। जैदी सरकार अमेरिका से भारी निवेश आकर्षित करना चाहती है, क्योंकि इराक की आर्थिक स्थिति फिलहाल ठीक नहीं है। ऐसे में पश्चिमी देशों का भरोसा जीतने के लिए यह छापेमारी बेहद जरूरी कदम मानी जा रही है।

जैदी की इस कार्रवाई ने उन ताकतों को सीधा संदेश दिया है जो सरकार के समानांतर अपनी सत्ता चला रही थीं। यह छापेमारी महज एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है बल्कि यह इराक की विदेश नीति में आ रहे एक बड़े बदलाव का संकेत भी है।


अराघची का दौरा और तेहरान की चिंताएं

इस पूरे ड्रामे के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बगदाद पहुंचना महज एक इत्तेफाक नहीं माना जा सकता। ईरान इस समय चौतरफा दबाव में है। अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ उसका तनाव चरम पर है।

बगदाद में इराकी विदेश मंत्री फूआद हुसैन के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने एक नया राग अलापा। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र के देशों के लिए एक नए सुरक्षा सहयोग ढांचे की वकालत की। अराघची का कहना था कि क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ यहीं के देशों की होनी चाहिए और बाहरी देशों यानी अमेरिका के दखल को पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए।

ईरान असल में इराक के भीतर अपने प्रभाव को कमजोर होते देख बेहद परेशान है। जिन अधिकारियों को इराकी सेना ने गिरफ्तार किया है, वे तेहरान के वित्तीय हितों और प्रतिबंधों से बचने के रास्तों को संभाल रहे थे। इन रास्तों के बंद होने का मतलब है कि ईरान के लिए आर्थिक रूप से मुश्किलें और बढ़ेंगी।

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होर्मुज जलडमरूमध्य की नई धमकी

अराघची ने अपनी इस यात्रा के दौरान केवल शांति की बातें नहीं कीं। उन्होंने इशारों-इशारों में व्यापार और जहाजों की आवाजाही को लेकर कड़ा रुख भी दिखाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान के व्यापारिक हितों और तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे, तो दूसरों के लिए भी समुद्री रास्ते सुरक्षित नहीं रहेंगे।

यह सीधी धमकी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर थी, जहां से दुनिया का एक तिहाई तेल गुजरता है। ईरान इस व्यापारिक गलियारे को अपनी सबसे बड़ी ढाल और हथियार की तरह इस्तेमाल करता आया है। लेकिन इस बार बगदाद का रुख बदला हुआ है। इराकी प्रधानमंत्री अब अपनी धरती का इस्तेमाल किसी भी क्षेत्रीय युद्ध या ईरान समर्थक मिलिशिया की गतिविधियों के लिए नहीं होने देना चाहते।


इराक में आगे क्या होने वाला है

इराक की इस आक्रामक कार्रवाई के बाद आने वाले दिन बेहद संवेदनशील होने वाले हैं। प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के इस कदम से ईरान समर्थक राजनीतिक दल और सशस्त्र मिलिशिया गुट पूरी तरह भड़क चुके हैं।

इस राजनीतिक उठापटक का असर सीधे तौर पर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। अगर आप इस पूरे घटनाक्रम को करीब से देख रहे हैं, तो आपको आने वाले दिनों में इन रणनीतिक मोर्चों पर नजर रखनी चाहिए

  • शिया मिलिशिया गुटों की प्रतिक्रिया का आकलन करें कि क्या वे बगदाद की सड़कों पर सरकार के खिलाफ सैन्य टकराव का रास्ता चुनते हैं।
  • इराकी तेल मंत्रालय में होने वाले प्रशासनिक बदलावों पर ध्यान दें जिससे पता चलेगा कि अवैध तेल तस्करी के रास्तों को कितनी मजबूती से बंद किया गया है।
  • वाशिंगटन और बगदाद के बीच होने वाले अगले दौर के आर्थिक समझौतों को देखें कि क्या अमेरिका इस कार्रवाई के बदले इराक को वित्तीय मदद जारी करता है।
  • इस्तांबुल में होने वाली परमाणु वार्ता में ईरान के रुख की समीक्षा करें क्योंकि अराघची पर इस समय देश के भीतर भी कट्टरपंथियों का भारी दबाव है।

यह साफ है कि बगदाद अब तेहरान के दबाव में झुकने को तैयार नहीं है। सेना के टैंकों ने ग्रीन जोन में घुसकर यह साबित कर दिया है कि सत्ता की कमान अब पूरी तरह इराकी सरकार के हाथों में है, न कि किसी बाहरी प्रभाव में।

DB

Dominic Brooks

As a veteran correspondent, Dominic Brooks has reported from across the globe, bringing firsthand perspectives to international stories and local issues.