मन में डर बैठ जाना क्या होता है, ये इस वक्त दक्षिणी फिलीपींस के मिंडानाओ द्वीप के लोग सबसे बेहतर समझ सकते हैं। शुक्रवार, 26 जून 2026 की शाम 7:42 बजे जब धरती एक बार फिर कांपी, तो लोगों के जहन में ठीक 18 दिन पुराना मंजर ताजा हो गया। रिक्टर स्केल पर 6.5 की तीव्रता वाले इस भूकंप ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान पैसिफिक रिंग ऑफ फायर की तरफ खींच दिया है।
सबसे बड़ी राहत की बात ये रही कि इस ताजा झटके से किसी बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया और तटीय इलाकों की निगरानी बढ़ा दी गई। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने शुरुआत में इसकी तीव्रता 6.7 बताई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 6.5 किया गया। इस भूकंप का केंद्र मिंडानाओ के जोस अबाद सैंटोस कस्बे से करीब 35 किलोमीटर दूर समुद्र में 52.4 किलोमीटर की गहराई पर था।
वेनेजुएला के बाद फिलीपींस में हलचल
सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के ठीक बाद फिलीपींस में ये झटका लगा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हैं? क्या पूरी दुनिया की टेक्टोनिक प्लेट्स में कोई बड़ी हलचल चल रही है?
सीधी बात ये है कि वैज्ञानिक इस थ्योरी को पूरी तरह खारिज करते हैं। वेनेजुएला में आए भूकंप और फिलीपींस की इस हलचल के बीच हजारों मील का फासला है। दोनों अलग-अलग टेक्टोनिक प्लेट्स के दबाव और उनकी अपनी फॉल्ट लाइन्स की वजह से आए हैं। यह महज एक संयोग है कि दोनों घटनाएं समय के बेहद कम अंतराल पर हुईं। फिलीपींस का अपना एक अलग भौगोलिक ढांचा है, जो इसे भूकंप के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में से एक बनाता है।
8 जून की तबाही का खौफ अभी बाकी है
इस 6.5 तीव्रता के झटके को कम आंका जा सकता था, अगर मिंडानाओ पहले से ही एक बड़े जख्म से न जूझ रहा होता। इसी महीने 8 जून 2026 को इस इलाके में 7.8 तीव्रता का एक बेहद विनाशकारी भूकंप आया था। उस आपदा में 81 लोगों की जान चली गई थी और 1,300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
8 जून के उस मुख्य झटके के बाद से अब तक करीब 7,400 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। शुक्रवार को आया यह भूकंप भी उसी सिलसिले का हिस्सा है या एक नया ट्रिगर, इस पर वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं। पुराना खौफ इतना गहरा है कि सांता मारिया कस्बे के रेस्क्यू ऑफिसर जरसन तालाहिग ने बताया कि झटका बहुत तेज था, टेबल और लाइटें तेजी से हिल रही थीं, लेकिन अच्छी बात ये रही कि ये बेहद कम समय के लिए था।
समुद्र तल का दो मीटर ऊपर उठ जाना
पिछले भूकंप ने भूगोल को किस तरह बदला, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि मिंडानाओ के दक्षिणी तट पर करीब 100 किलोमीटर के हिस्से में 'कोस्टल अपलिफ्ट' (तटीय उभार) देखा गया। समुद्र की सतह करीब दो मीटर तक ऊपर उठ गई, जिससे सदियों से पानी में डूबी कोरल रीफ (मूंगा चट्टानें) अचानक सतह पर बाहर आ गईं और तटरेखा लगभग 200 मीटर आगे खिसक गई। जब जमीन का ढांचा इस हद तक बदल चुका हो, तो उसके बाद आने वाला हर छोटा-बड़ा झटका लोगों की सांसें अटकाने के लिए काफी होता है।
रिंग ऑफ फायर और कोटाबाटो ट्रेंच का खतरनाक खेल
फिलीपींस की इस बदकिस्मती के पीछे असली हाथ पैसिफिक रिंग ऑफ फायर का है। यह दुनिया का सबसे एक्टिव भूकंपीय क्षेत्र है। इसके अलावा, मिंडानाओ के दक्षिणी तट से महज 50 किलोमीटर दूर 'कोटाबाटो ट्रेंच' मौजूद है। यह एक ऐसी समुद्री खाई है जहां लगातार टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं और नीचे धंसती हैं।
इस इलाके में जनवरी से ही भूकंप के छोटे-छोटे झटके यानी 'अर्थक्वेक स्वार्म' देखे जा रहे थे। जब कोई इलाका इतने सारे एक्टिव फॉल्ट्स के जाल पर बसा हो, तो वहां भूकंप को रोकना नामुमकिन है। आप सिर्फ तैयारी बेहतर कर सकते हैं।
सुनामी की चेतावनी क्यों नहीं आई
भूकंप के तुरंत बाद लोगों में सबसे बड़ा डर सुनामी को लेकर था। पैसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर और स्थानीय प्रशासन ने साफ किया कि इस बार सुनामी का कोई खतरा नहीं है। इसके पीछे दो मुख्य तकनीकी कारण हैं:
- भूकंप की गहराई: इस भूकंप का केंद्र जमीन से 52.4 किलोमीटर नीचे था। इतनी गहराई पर होने वाले कंपन से समुद्र के पानी में वो खतरनाक उथल-पुथल नहीं होती जो सुनामी ला सके।
- ऊर्जा का वर्टिकल रिलीज न होना: सुनामी तब आती है जब समुद्र की सतह अचानक ऊपर या नीचे की तरफ तेजी से विस्थापित हो। इस झटके की प्रकृति ऐसी नहीं थी कि पानी का बड़ा हिस्सा डिस्प्लेस हो सके।
अगले कुछ दिन मिंडानाओ के लिए क्यों अहम हैं
भले ही इस झटके से कोई नया नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि खतरा टल गया है। स्थानीय लोगों और प्रशासन को अगले 48 से 72 घंटों तक बेहद सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि इस तीव्रता के भूकंप के बाद 5.0 से लेकर 5.8 तीव्रता तक के मजबूत आफ्टरशॉक्स आने की आशंका बनी रहती है, जो पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों को गिराने के लिए काफी हैं।
डिजास्टर मैनेजमेंट टीमों ने प्रभावित इलाकों में फील्ड असेसमेंट शुरू कर दिया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने घरों की दीवारों और पिलर्स की जांच करें। अगर 8 जून के भूकंप के बाद घरों में दरारें आई थीं, तो ऐसे ढांचे के अंदर रुकना फिलहाल सुरक्षित नहीं है। आपदा से निपटने का इकलौता तरीका यही है कि पैनिक करने के बजाय उन बेसिक प्रोटोकॉल्स का पालन किया जाए जो प्रशासन लगातार रेडियो और सोशल मीडिया के जरिए जारी कर रहा है।